धान की खेती कैसे करें (Dhan Ki Kheti Kaise Kare) | 2025 में ज्यादा पैदावार पाने के तरीके
धान भारत की प्रमुख फसलों में से एक है और देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ मानी जाती है। यदि आप सोच रहे हैं धान की खेती कैसे करें, तो इसके लिए सही तैयारी, नर्सरी प्रबंधन, बुवाई विधियाँ, सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन, कीट-रोग नियंत्रण और समय पर कटाई की जानकारी होना आवश्यक है।
धान की खेती करने के लिए सबसे पहले नर्सरी तैयार करें, फिर बुवाई/रोपाई या Direct Seeded Rice विधि अपनाएँ। नियमित सिंचाई, सही मात्रा में उर्वरक, कीट-रोग प्रबंधन और समय पर कटाई से अधिक पैदावार मिलती है।
धान की खेती स्टेप-बाय-स्टेप
- नर्सरी तैयार करें — बीज उपचार, मृदा तैयारी।
- समय पर बुवाई/रोपाई (DSR या SRI) करें।
- नियमित सिंचाई और जल प्रबंधन।
- उर्वरक 3 किस्तों में दें — NPK संतुलन।
- कीट और रोग नियंत्रण — जैविक व रासायनिक उपायों से।
- कटाई तब करें जब दाने सुनहरे और नमी 20–22% हो।
धान की खेती की तैयारी
धान की नर्सरी कैसे बनाएं
- सबसे पहले 40–45 दिन पहले नर्सरी तैयार करें।
- 1 एकड़ धान के लिए लगभग 5–6 किलो बीज की आवश्यकता होती है।
- बीजों को फफूंदनाशी दवा (Trichoderma / Bavistin) से उपचारित करें।
- नर्सरी बेड की मिट्टी भुरभुरी व अच्छी जलनिकासी वाली हो।
- पानी भराव न हो इसके लिए किनारों पर मेढ़ बना लें।
धान की नर्सरी जून-जुलाई में तैयार करना सबसे उपयुक्त माना जाता है।
मिट्टी और जलवायु
- धान की खेती के लिए दोमट या चिकनी मिट्टी सबसे उपयुक्त है।
- औसत तापमान 20–35°C और पर्याप्त वर्षा (100–150 से.मी.) जरूरी है।
- धान खरीफ फसल है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में रबी और ग्रीष्मकालीन धान भी होता है।
धान की बुवाई की विधियाँ
धान की बुवाई कैसे करें
- परंपरागत रोपाई विधि
- Direct Seeded Rice (DSR) → बीजों को सीधे खेत में बोया जाता है।
- SRI (System of Rice Intensification) → कम पानी व कम बीज में अधिक पैदावार।
DSR क्या है? (फायदे और नुकसान)
फायदे:
- पानी की बचत (25–30%)
- मजदूरी लागत कम
- फसल जल्दी तैयार
नुकसान:
- खरपतवार की समस्या ज्यादा
- बीज गुणवत्ता पर निर्भर
| विधि | लागत | पानी की खपत | पैदावार | मजदूरी |
|---|---|---|---|---|
| रोपाई | अधिक | अधिक | स्थिर | ज्यादा |
| DSR | कम | कम | अच्छी | कम |
धान की सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन
धान की सिंचाई कितनी बार करें?
- रोपाई के तुरंत बाद खेत में 3–5 से.मी. पानी भरें।
- पौधे 25–30 दिन के होने पर 2–3 बार सिंचाई करें।
- फूल आने और दाना भरने की अवस्था में नमी बहुत जरूरी है।
- जल प्रबंधन से पैदावार 20% तक बढ़ाई जा सकती है।
उर्वरक कब और कितना दें?
NPK अनुशंसा (प्रति एकड़):
- नाइट्रोजन (Urea) – 50–60 किग्रा
- फॉस्फोरस (DAP) – 20–25 किग्रा
- पोटाश – 20–25 किग्रा
3 किस्तों में डालें:
- रोपाई के समय
- 25–30 दिन बाद
- फूल आने से पहले
जैविक धान की खेती
- गोबर की खाद, हरी खाद, वर्मी-कम्पोस्ट का प्रयोग करें।
- नीम की खली व जीवामृत से कीट-नियंत्रण करें।
- यह तरीका लागत कम करता है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है।
धान की फसल में कीट व रोग प्रबंधन
प्रमुख कीट
- ब्राउन प्लांट हॉपर (BPH): पत्तियाँ पीली पड़ जाती हैं।
👉 उपाय: इमिडाक्लोप्रिड या फिप्रोनील का छिड़काव।
- लीफ फोल्डर: पत्तियाँ लपेटकर अंदर से खाते हैं।
👉 उपाय: Triazophos / Chlorpyriphos।
- स्टेम बोरर: तना काट देता है, जिससे पौधे सूख जाते हैं।
प्रमुख रोग
- ब्लास्ट रोग: पत्तियों पर भूरे धब्बे।
- शीथ ब्लाइट: तने पर फफूंदी।
👉 जैविक उपाय: नीम तेल (5 मिली/लीटर पानी) का छिड़काव।
धान की कटाई और भंडारण
धान की कटाई का सही समय
- जब दानों का 80–85% भाग सुनहरा हो जाए।
- नमी 20–22% रहनी चाहिए।
- जल्दी कटाई = अधपका धान, देर से कटाई = दाने झड़ने लगते हैं।
कटाई की विधियाँ
- हाथ से दरांती द्वारा
- मशीन (Combine Harvester)
भंडारण
- साफ व सूखी जगह पर रखें।
- नमी ≤ 12% होनी चाहिए।
- धान भंडारण के लिए नीम की पत्तियाँ डालने से कीट कम होते हैं।
धान की खेती की लागत और मुनाफा
धान की खेती लागत प्रति एकड़ (औसत)
| मद | लागत (₹ प्रति एकड़) |
|---|---|
| बीज | 1,200 – 1,500 |
| जुताई | 2,000 – 2,500 |
| खाद व कीटनाशक | 3,000 – 4,000 |
| मजदूरी | 4,000 – 5,000 |
| सिंचाई | 1,500 – 2,000 |
| कुल लागत | 12,000 – 15,000 |
पैदावार और मुनाफा
- औसतन पैदावार: 20–25 क्विंटल/एकड़
- MSP (2025): ~₹2,300 प्रति क्विंटल (अनुमानित)
- कुल आमदनी: ₹46,000–57,500
- शुद्ध लाभ: ₹30,000–40,000 प्रति एकड़
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
👉 जून से जुलाई सबसे उपयुक्त समय है।
👉 लगभग 20–25 बार सिंचाई की जरूरत होती है।
👉 Pusa Basmati, MTU 7029, Swarna प्रमुख किस्में हैं।
👉 जब 80–85% दाने सुनहरे हो जाएं।
👉 लगभग ₹30,000–40,000 का शुद्ध लाभ।
निष्कर्ष
धान की खेती भारत के किसानों के लिए न सिर्फ रोजगार का साधन है, बल्कि यह देश की खाद्य आपूर्ति का महत्वपूर्ण आधार भी है। यदि किसान नर्सरी तैयारी से लेकर कटाई तक सभी चरणों पर ध्यान दें, तो पैदावार 20–25% तक बढ़ाई जा सकती है।